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SGOT/SGPT बढ़ा है? जानिए इसका मतलब, नॉर्मल रेंज और कारण

21 October 20266 min
SGOT/SGPT बढ़ा है? जानिए इसका मतलब, नॉर्मल रेंज और कारण

SGOT/SGPT Test in Hindi: ब्लड रिपोर्ट में SGOT या SGPT बढ़ा हुआ है? जानिए इसकी नॉर्मल रेंज, बढ़ने के कारण, फैटी लिवर से इसका संबंध और कब डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। पूरी जानकारी आसान हिंदी में।

रिपोर्ट में SGOT 78 और SGPT 92 लिखा है? अगर इन नंबरों को देखकर आप परेशान हैं, तो सबसे पहले यह समझिए कि SGOT और SGPT का बढ़ना हमेशा किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता। कई बार फैटी लिवर, कुछ दवाओं, वायरल संक्रमण या तेज व्यायाम के कारण भी ये बढ़ सकते हैं।

लेकिन इन नंबरों को नजरअंदाज करना भी सही नहीं है। इनकी सही व्याख्या के लिए यह समझना जरूरी है कि SGOT और SGPT क्या हैं, इनकी सामान्य रेंज कितनी होती है और बढ़ने पर क्या करना चाहिए। इस लेख में हम SGOT/SGPT टेस्ट से जुड़ी जरूरी बातें आसान हिंदी में समझेंगे।

SGOT और SGPT क्या होते हैं?

SGOT और SGPT शरीर में पाए जाने वाले एंजाइम हैं। जब लिवर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता है, तो इन एंजाइम का स्तर खून में बढ़ सकता है। इसी वजह से डॉक्टर लिवर की स्थिति का आकलन करने के लिए इनकी जांच कराते हैं।

इनके मेडिकल नाम हैं:

  • SGOT (AST): Aspartate Aminotransferase
  • SGPT (ALT): Alanine Aminotransferase

SGOT और SGPT इनके पुराने नाम हैं, जो आज भी कई ब्लड टेस्ट रिपोर्ट में इस्तेमाल किए जाते हैं।

दोनों में एक महत्वपूर्ण अंतर है। SGPT यानी ALT मुख्य रूप से लिवर में पाया जाता है, जबकि SGOT यानी AST लिवर के अलावा मांसपेशियों, दिल और शरीर के अन्य ऊतकों में भी मौजूद होता है। इसलिए SGOT बढ़ने का मतलब हमेशा लिवर की बीमारी होना नहीं है। डॉक्टर दोनों के स्तर और दूसरी जांचों को देखकर संभावित कारण समझते हैं।

SGOT और SGPT की नॉर्मल रेंज कितनी होती है?

SGOT और SGPT की सामान्य रेंज लैब के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती है। एक सामान्य उदाहरण इस प्रकार है:

टेस्टआम संदर्भ रेंज
SGOT (AST)10–40 U/L
SGPT (ALT)7–56 U/L

यह केवल एक सामान्य उदाहरण है। अपनी रिपोर्ट पर दी गई संदर्भ रेंज को प्राथमिकता दें।

अगर आपका SGOT या SGPT सामान्य सीमा से थोड़ा बढ़ा हुआ है, तो केवल इसी आधार पर किसी बीमारी का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। डॉक्टर आपकी उम्र, लक्षण, मेडिकल हिस्ट्री और अन्य जांचों के आधार पर इसका आकलन करते हैं।

SGOT और SGPT बढ़ने के क्या कारण हैं?

1. फैटी लिवर फैटी लिवर में लिवर की कोशिकाओं में जरूरत से ज्यादा चर्बी जमा होने लगती है। अधिक वजन, डायबिटीज और कुछ मेटाबॉलिक समस्याओं वाले लोगों में इसका जोखिम बढ़ सकता है। फैटी लिवर होने पर कई लोगों में शुरुआत में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देता। ऐसे में ब्लड टेस्ट के दौरान SGOT या SGPT बढ़ा हुआ मिल सकता है।

2. शराब का सेवन शराब का नियमित या अधिक सेवन लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है। कुछ मामलों में SGOT का स्तर SGPT से अधिक बढ़ सकता है। हालांकि, केवल इन दोनों नंबरों की तुलना करके शराब से जुड़ी लिवर बीमारी की पुष्टि नहीं की जा सकती।

3. दवाओं और सप्लीमेंट का प्रभाव कुछ दवाएं और हर्बल सप्लीमेंट लिवर एंजाइम बढ़ा सकते हैं। इनमें कुछ एंटीबायोटिक, कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवाएं और पैरासिटामोल की जरूरत से ज्यादा मात्रा शामिल हैं। अगर आपकी रिपोर्ट में SGOT या SGPT बढ़ा है, तो डॉक्टर को अपनी सभी दवाओं और सप्लीमेंट की जानकारी दें। अपनी मर्जी से कोई दवा बंद न करें।

4. वायरल हेपेटाइटिस हेपेटाइटिस A, B और C जैसे संक्रमण लिवर में सूजन पैदा कर सकते हैं। कुछ मामलों में SGOT और SGPT का स्तर काफी बढ़ सकता है। डॉक्टर लक्षणों और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर हेपेटाइटिस से जुड़ी जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।

5. तेज व्यायाम या मांसपेशियों में चोट जोरदार कसरत, मांसपेशियों में चोट या कुछ मांसपेशियों से जुड़ी समस्याओं के कारण भी SGOT बढ़ सकता है। इसलिए टेस्ट से पहले की गई भारी कसरत के बारे में डॉक्टर को बताना उपयोगी है।

SGOT बढ़ा है लेकिन SGPT सामान्य है, तो क्या करें?

अगर SGOT बढ़ा हुआ है लेकिन SGPT सामान्य है, तो इसकी वजह लिवर के अलावा मांसपेशियों या शरीर के अन्य ऊतकों से भी जुड़ी हो सकती है।

वहीं, अगर SGPT का स्तर SGOT से ज्यादा है, तो डॉक्टर लिवर से जुड़ी समस्याओं की जांच कर सकते हैं। फैटी लिवर, वायरल हेपेटाइटिस और दवाओं का प्रभाव कुछ संभावित कारण हैं।

डॉक्टर जरूरत पड़ने पर बिलीरुबिन, ALP, GGT या अन्य ब्लड टेस्ट भी देख सकते हैं। ध्यान रखें: केवल SGOT और SGPT के नंबरों या उनके अनुपात के आधार पर खुद बीमारी का पता लगाने की कोशिश न करें। सही निष्कर्ष के लिए पूरी रिपोर्ट और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी जरूरी होती है।

SGOT/SGPT बढ़ने पर डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

अगर रिपोर्ट में SGOT या SGPT बढ़ा हुआ है, तो डॉक्टर से सलाह लेकर इसका कारण समझें। कुछ मामलों में डॉक्टर दोबारा टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं। यह फैसला बढ़ोतरी की मात्रा, लक्षणों और संभावित कारणों पर निर्भर करता है।

इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें:

  • आंखों या त्वचा का पीला पड़ना यानी पीलिया
  • पेशाब का असामान्य रूप से गहरा होना
  • मल का रंग हल्का पड़ना
  • पेट के दाईं ओर ऊपरी हिस्से में लगातार दर्द
  • बिना वजह थकान, भूख कम लगना या वजन घटना

अगर उल्टी में खून आए, भ्रम की स्थिति हो या असामान्य रूप से सुस्ती महसूस हो, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।

यह भी जरूरी है कि डॉक्टर को दिखाने का फैसला केवल SGPT के किसी एक नंबर, जैसे 200 U/L, के आधार पर न करें। कम स्तर पर भी जांच जरूरी हो सकती है, जबकि अधिक स्तर का अर्थ समझने के लिए भी पूरी स्थिति का आकलन करना पड़ता है।

SGOT/SGPT टेस्ट से पहले क्या खाली पेट रहना जरूरी है?

SGOT और SGPT की जांच के लिए आमतौर पर अलग से खाली पेट रहने की जरूरत नहीं होती।

लेकिन अगर ये टेस्ट Liver Function Test (LFT), शुगर या लिपिड प्रोफाइल जैसी दूसरी जांचों के साथ लिखे गए हैं, तो कुछ जांचों के लिए फास्टिंग जरूरी हो सकती है। इसलिए टेस्ट से पहले डॉक्टर या लैब से निर्देश जरूर पूछ लें। अगर आपने हाल में भारी व्यायाम किया है या कोई नई दवा शुरू की है, तो इसकी जानकारी भी दें।

लखनऊ में SGOT/SGPT टेस्ट कहां करवाएं?

अगर आप खरगापुर, गोमती नगर, लखनऊ में रहते हैं, तो हमारे सेंटर पर LFT और SGOT/SGPT टेस्ट के लिए संपर्क कर सकते हैं। होम सैंपल कलेक्शन बिल्कुल FREE है — जांच की उपलब्धता और रिपोर्ट मिलने के समय की जानकारी के लिए +91 9451155402 पर कॉल या WhatsApp करें।

रिपोर्ट में SGOT या SGPT बढ़ा हुआ आने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है, ताकि सही कारण का पता लगाया जा सके और जरूरत के अनुसार आगे की जांच कराई जा सके।

*डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। यह डॉक्टर की सलाह, निदान या इलाज का विकल्प नहीं है। संदर्भ: MedlinePlus (AST Test, ALT Blood Test, Liver Function Tests); American College of Gastroenterology (Evaluation of Abnormal Liver Chemistries)।*

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